Wednesday, September 2, 2009

Food Corp. of India पर visit

११.०८.०९ को मे अनाज के गोदाम यानी were house पहोंचा जहा से सभी रेशन दूकान पर अनाज supply किया जाता है। बोरीवली और कांदीवली station के बीच बना है यह गोदाम। दूर से ही देखने से समझ में आता है के यह सरकारी गोदाम है। बाहर गेट पर बड़ा पुराना सा Board लगा था जिस पर लिखा था Food Corporation Of India यानी FCI


मै ने देखा के गेट पर खड़ा गार्ड अनजान लोगो को अन्दर जाने नही दे रहा है। मै सोचने लगा के अन्दर बैठे किसी भी अफसर का नाम मै नही जानता हूँ, गार्ड को क्या बोलू के मुझे किस से मिलाना है। अगर मै गार्ड से ये कहू के मै research के सिलसिले में यहाँ आया हूँ तो वह मुझे अन्दर जाने नही देंगा। अब मै अन्दर जाऊ तो कैसे ?
अचानक मै ने देखा के चंद लोग बिना इजाज़त अन्दर चले गए और गार्ड ने उन से कुछ पूछा भी नही।
मै ने भी दिल में अल्लाह का नाम लिया और गेट के अन्दर घुसता चला गया ना गार्ड ने मुझे रोका और ना ही कुछ पूछा ।
गेट से लग कर वज़न weight bridge (वज़न काटा ) था । रास्ते के सीधे हाथ पर कतार से गोदाम बने हुऐ थे जहा दो ट्रक खड़े थे और बाए हाथ पर आफिस थे । 
 मै ने अंदाजा लगाया की मुझे जिन अफसरों से बात करना है वे मुझे यही मिलेगे । और एक ऑफिस के अन्दर चला गया । बड़ी सी टेबल के पीछे कुर्सी पर एक अधेड़ उम्र के सज्जन बैठे थे उन के टेबल पर लकडी की एक तख्ती रखी हुई थी जिस पर लिखा था Mr V.G. Khobragade.
मै ने उनहे नमस्ते कहा उन्होंने मुझे सामने रखी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया । मैंने उन्हें अपने आने का मकसद बताया तो वह चोक गए फिर उन्होंने मेरा I.D. Proof माँगा , मैंने पिछली रिसर्च के पुकार का पहचान पात्र दिया , देखने के बाद कहा "पूछए क्या पूछना है ? मेरा नाम रफीक है और सर आप का नाम ? उन्होंने अपना नाम बताया और कहा के वह यहाँ के मेनेजर है । मैंने दूसरा सवाल किया । क्या वजह है के रेशन पर लोगो को उनके हिस्से का अनाज नही मिल पा रहा है ?
पहले आप को बता दू के में सेन्ट्रल goverment का आदमी हूँ महाराष्ट्र सरकार हमें आर्डर देती है के उन्हें कितना अनाज चाहिए और हम उन्हें उतने अनाज का D. O. बना कर सप्लाये कर देते है । आगे वह अनाज किधर जाता है हमें नही मालूम ।
जब सरकार आप के गोदाम में अच्छा अनाज भेजती है तो वह अनाज रेशन दूकान पर जाते ही ख़राब कैसे हो जाता है ? मैंने दूसरा सवाल किया ।
'अनाज हमें सरकार रेलवे द्वारा भेजती है । पिछले हफ्ते हमें चार कंटेनर में कुछ कीडे दिखे , वह कीडे अनाज की बोरियो से नही गिरे थे और न ही वह अनाज के कीडे थे मगर हम ने अपनी delivery report में यह भी लिखा के हमें कोन से कंटेनर में कितने कीडे मिले ' उन्होंने एक फाईल मेरे सामने रख दी जिस पर कीडो के बारे में लिखा हुआ था ।
फिर वह उठेकर बाहर चले गए और आते वकत अपने साथ किसी दूसरे सज्जन को ले आए । इन का नाम S.P. gunvir है । मैं D.O. इन्हे देता हूँ और ट्रक में लोड करवाने के लिए ये आर्डर आगे बढवा देते है । हम से लिया हुआ अनाज किस रेशन दुकान पर जाता है हमें कुछ पता नही , और ये पता करना हमारा कम भी नही है '
V.G. Khobragade ने छुपे लफ्जों में कह दिया के बाहेर की कालाबाजारी से उन का कोई लेना देना नही है ।
मैंने झट से पूछ लिया "ठीक है आप का इन मामले से कोई लेना देना नही मगर मै आप से एक बात पूछना चाहता हूँ की जब आप को भारत सरकार अच्छी किस्म का अनाज देती है और अपने कंटेनर से अच्छा अनाज उतारा आप ने महाराष्ट्र सरकार को अच्छा अनाज सोपा आप का कम ख़त्म । मगर जब आप किसी रेशन दुकान पर रेशन दुकानदार को ख़राब अनाज देते हुए देखते है तो आप के अन्दर कुछ बेचैनी नही होती? की आप के अच्छा अनाज देने के बाद भी रेशन दुकानों पर ख़राब अनाज दिया जारहा है ? जो के ख़राब अनाज आप ने कभी delivery दिया ही नही है ।
"आप की बात बहोत जज़बाती है , हमें भी एसा लगता है के इस कालाबाजारी के ख़िलाफ़ कुछ करे मगर हम नही कर पाते , हो सकता है के उन लोगो का कोई बड़ा गिरोह हो जिस से हमें बाद में नुक्सान उठाना पड़े ।
जैसे ? मैंने पूछ ही लिया ।
ये लोग हमें किसी दूसरे बहाने से डराए या धमाकाये । हमें बदनाम करें और हो सके तो हमारा किसी ट्रैक से अक्सिडेंट करवा दे.
इतना कह के उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया । इसका मतलब अब मुझे वहा से चलना चाहिए ।






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