पिछली फ़ाइनल रिपोर्ट में हम ने बताया था के किस कार्ड पर किसे कितना अनाज मिलना चाहिए.
मगर जिन के पास कार्ड ही न हो, वोह ग़रीब लोग जिन के पास घर ही न हो, वोह लोग सडको के किनारे फूटपाथ पर रहते है, जिन का कोई ठिकाना न हो?
ऐसे लोगो को `बेघर कार्ड` दिया जाता है. इस रेशन कार्ड पैर पूरे महीने में कभी भी 35 Kg . अनाज मिलने की सुविधा है, जोके 7 Rs. गेहू और 9 Rs.चावल के हिसाब से मिलता है.
हम अक्सर देखते है के सडको के किनारे हमारे देश के बुज़ुर्ग बूढ़े यहाँ-वह भीक मांग रहे है, उन की हालत बहुत ही ख़राब है, उन लोगो के लिए “अन्ना पूर्ण” नाम की योजना सर्कार ने रक्खी है , जिस में 65 साल के ऊपर के बुजुर्गो के लिए 10 Kg अनाज बिलकुल मुफ्त दिया जाता है.
हमे बहोत सी जगह `बेघर कार्ड ` और अन्ना पूर्ण के बहोत से हक़दार दिखाई देते है , मगर यह लोग सडको पर भिक मांग कर या दुसरे कोई छोटे–मोटे काम करके अपना गुज़ारा करते है, ऐसा क्या ?
1) इन्हें इन योजनाओ के बारे में जानकारी ही नहीं है.
2) यह लोग रेशन की दुकान पर गई होंगे , मगर दुकानदार ने उन्हें भगा दिया होंगा ,
3) या यह लोग ऐसे ही खुश है की कों दुकान पर जाये, बिना हाथ पैर हिलाई थोड़ी से मेहनत से उन्हें कुछ- न -कुछ मिल रहा है .
अगर इन्हें इन योजनाओ केबारे में जानकारी नहीं है तो उन्हें बताय कोन?
क्या यह ज़िम्मेदारी रेशन ऑफिसर की नहीं है ? वोह यह देखे की उस के Working इलाके में इस योजना के कितने हक़दार लोग है, वोह उन्हें खुद जाकर बताये की आप लोगो को यहाँ-वहा हाथ फैलाने की ज़रुरत नहीं है, सरकार ने आप जैसे लोगो के लिए अलग इन्तेजाम किया हुवा है, आप लोग रेशन की दुकान पर जाकर अपने हिस्से का अनाज ले सकते है, मगर उस बेचारे के पास फालतू समय कहा है ?
क्या यह ज़िम्मेदारी रेशन दुकानदार की नहीं है? की वोह देखे की उस की दुकान के करीब कोई ग़रीब भीख मांग कर अपना और अपने परिवार का पेट भर रहा है. पर दुकानदार अपनी दुकान छोड़ कर क्यों जय इन बेकार बातो के लिए . अगर कोई भिकारी उस की दुकान पर आ भी जाता है तो वोह उसे 2-5 रूपए देकर चलता कर देंगा.
तो क्या यह ज़िम्मेदारी हम जैसे Social Workers की नहीं है? मगर हम भी यही सोचते है की जब रेशन Officer को उन की फिकर नहीं है. जब दुकानदार के पास समय नहीं है , तो हम क्या कर सकते है, चाहे हमारे रिक्शा के सामने कोई औरत एक बच्चा गोद में और एक बच्चा अपनी कोख में लिए हमारे सामने हाथ फैले.
या जब हम कभी बरसात के मोसम में किसी ठेले वाले से गरम-गरम पकोड़ो का मज़ा ले रहे हो और उस समय हमारे सामने बारिश में भीगती हुई कोई बुढया हम से कुछ खाने को मांगे,
या फिर फूट पथ पर चलते समय हमें कोई कमज़ोर बीमार भूखा ग़रीब बूढा दिखाई दे.
हम क्या करेंगे, हम उन्हें कुछ पैसे या थोडा खाना देकर अपना पीछा छुड़ा लेंगे,
मगर हम उन्हें रतिओं की दुकान पर लेजाकर यह नहीं बताएँगे के तुम्हे हमारे या किसी के भी आगे हाथ फैलाने की कोई ज़रुरत नहीं है, तुम्हारे लिए सरकार ने अनाज का इन्तेजाम किया हुवा है,
मगर हम यह सब क्यों करे , हम कोई Mather Tressa थोड़ी है, Social Work बोलने सुनने और लिखने के लिए ही अच्छा लगता है.
जोगेश्वरी का इतिहास
· जोगेश्वरी देवी मंदिर के नाम पर इस जगह का नाम रखा गया .
· एक तरफ w.e. highway है , तो उसी को छूता जोगेश्वरी-विखरोली link road है.
· बोरीवली नेशनल पार्क का जंगल इसी link road पर समाप्त होता है .
· जिस तरह नेशनल पार्क के पहाड़ो पर गुफाये (canary cavas) है, उसी तरह की
· दो गुफा जोगेश्वरी में भी है .
· जोगेश्वरी स्टेशन से जो रोड निकलता है , उसे गुफा रोड कहते है.
· गुफा रोड जहा ख़तम होता है , वही jogeshwari देवी का मंदिर है.
· स्टेशन से बहार निकलते ही ‘ismail yusuf college है , जिस की शुरुवात 1924 में हुई थी .
· W.E. highway के करीब का इलाका प्रेम नगर कहलाता है . हमारी पहले research की शुरुवात यही से हुई थी .
· ये इलाका 1960-65 में बसना शुरू हुवा .
· Colaba, bandra , और andheri की बस्तियों को यहाँ shift किया गया था .
· ये लोग जहा से आये थे इन्होने अपने मोहल्ले का नाम भी वैसा ही रक्खा . जैसे बांद्रा से आये हुए लोगो ने बांद्रा प्लाट , कोलाबा से आये हुए लोगो ने कोलाबा प्लाट और अँधेरी से आये हुए लोगो ने अँधेरी प्लाट .
· बाद में मुंबई के तड़ीपार अपराधी भी यहाँ आना शुरू हुआ .
· जिन्होंने आते ही यहाँ की ज़मीनों पर कब्ज़ा करना शुरू किया ,
· कच्चे माकन बनाये और इन्हें किराये पर देने लगे ,
स्टेशन के करीब ही एक shoes company थी , जिस का नाम c.s.c. (carona shoes co.) था , इस company में काम करने वाले workers ने प्रेम नगर की बस्तियों में किराये से माकन लेकर रहने लगे ,
बाद में इन्द्रा गाँधी ने photo pas system कानून लागु किया , जिस में जो लोग 15 साल से एक ही किराये के माकन में रहते है , वो माकन उस का हो जायेंगा . लोग रातो रात माकन के मालिक बन गए . मगर आज भी उन अपराधियों के बच्चो का दबदबा कायम है .
बांद्रा प्लाट , अँधेरी प्लाट , कोलाबा प्लाट , ईद गाह मैदान , रामगढ़ , ये सब इलाका U.P. west Bengal और Maharashtra से आये हुए लोगो के थे . जिन में मुसलमानों की आबादी करीब 70 % थी . आज यहाँ 90% मुस्लिम रहते है .
प्रेम नगर जहा समाप्त होता है वहा से मेघ वाड़ी , सर्वोदय नगर , मजास वाड़ी , और शंकर वाड़ी नाम की बस्तिया शुरू होती है , जो के प्रेम नगर के चारो तरफ फैली हुई है , और यहाँ हिन्दू समाज की आबादी 90% है . हमारी advance research का आगाज़ (शुरुवात ) यही से होगा .
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